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सोशल मीडिया और OTT प्लेटफार्म के लिए भारत सरकार की नई गाइडलाइन क्या है? | New Guidelines for Facebook, Twitter, OTT Platforms

एक और जहाँ भारत सरकार डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दे रही है वहीँ दूसरी और सरकार भारत के नागरिकों की प्राइवेसी, सुरक्षा और उनकी हितों की रक्षा को लेकर भी बड़े और अहम् फैसले लेने से नहीं कतरा रही है। 

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बीते कुछ महीनों में भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया और साइबर सिक्योरिटी को लेकर एक के बाद एक ताबरतोर फैसले लिए है।  

 

पिछले साल जून में, भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा ’का हवाला देते हुए सरकार ने 59 ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था और उसके बाद सितंबर के महीने में 118 ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया था जिसमे सबसे चर्चित ऐप PUBG भी शामिल था।

 

अब भारत सरकार ने डिजिटल कंटेंट पर लगाम कसने के लिए नए नियम और कानून बनाए है, जिसके अंतर्गत फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब से लेकर OTT प्लेटफॉर्म के सभी दिग्गज कंपनियां शामिल है। 

 

आइये डिटेल में समझते है कि भारत सरकार की सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म को लेकर नई गाइडलाइन क्या है ?

New guidelines for Social Media, OTT platforms

अब से पहले तक किसी प्रकार का कोई कानून न होने की वजह से, खुरापाती लोग किसी के खिलाफ कुछ भी गलत बोल देते थे , किसी की भी अप्पतिजनक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर देते थे , बल्कि किसी कंपनी या किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के खिलाफ अपशब्द बोल कर उसकी गरिमा को ठेस पहुंचने की कोशिश करते थे , परन्तु अब से ऐसा नहीं है , इस क़ानून के बनने के बाद इस प्रकार की एक्टिविटी में कमी आएगी। 

 

सोशल मीडिया के नए कानून के अनुसार, अब अगर कोई व्यक्ति आपको सोशल मीडिया अथवा इंटरनेट के माध्यम से ब्लैकमेल करता है,आपके खिलाफ कुछ गलत बोलता है , गाली गलौज करता है या किसी अपशब्द भाषा का प्रयोग करता है जिससे आपकी गरिमा को ठेस पहुँचता है तो आप अब उस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत कर सकते हो।  और यही नहीं आपकी शिकायत के बाद उस पर 15 दिन के अंदर कार्यवाही भी की जाएगी।

 

भारत सरकार ने सभी डिजिटल कंटेंट प्रोडूसिंग कंपनी को यह आदेश दिया है की किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को 24 घंटे के भीतर हटाना होगा और साथ ही कुल शिकायतों और उनके निपटारे की जानकारी हर महीने सरकार को देनी होगी।  

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इंटरनेट के उपयोग के घनत्व कि दृष्टि से भारत दुनिया में दुसरे स्थान पर है, मतलब भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है जहाँ सबसे ज्यादा इंटरनेट का उपयोग होता है।

 

और अगर सोशल मीडिया यूजर्स कि बात करें तो भारत में व्हाट्सअप यूजर 53 करोड़, फेसबुक यूजर्स 41 करोड़ इंस्टाग्रामयूजर्स 21 करोड़ है।  ऐसे में भारत के नागरिकों के हितों की सुरक्षा के लिए नियम और कानून होना अनिवार्य हो जाता है।  

 

बहुत दिनों से यह चर्चा थी कि सोशल मीडिया और फेक न्यूज़ को लेकर कोई नियम क्यों नहीं है।  सोशल मीडिया पर आये दिन फेक न्यूज़ और आपत्तिजनक कंटेंट  मनमानी तरीके से  ट्रेंड होती थी जो भारत और भारत के नागरिको के लिए असहजता का कारण बन जाती थी।

 

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कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के लिए आपत्तिजनक या अपशब्द भाषा का उपयोग कर उसे बदनाम करने की कोशिश करता था। लेकिन नए कानून के बाद अब ऐसी सभी एक्टिविटी पर कंपनियों का नियंत्रण हो सकेगा और फेक न्यूज़ और आपत्तिजनक कंटेंट लिखने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही कि जा सकेगी। 

 

नए कानून के मुताबिक , सोशल मीडिया कंपनियों को यह आदेश है कि सोशल मीडिया से संबंधित लोगों की शिकायतों को सुनने और उनका समाधान करने के लिए एक व्यवस्था बनाई जाए, तथा अफसरों की नियुक्ति करे जो सोशल मीडिया यूजर की शिकायत को सुने और उस पर कार्यवाही करे । 

 

कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात पर चिंता जताते हुए कहा था कि फेक न्यूज़ और सोशल मीडिया से सम्बन्धिक एक ठोस कानून बनाना महत्वपुर्ण है ताकि सोशल मीडिया के किसी प्रकार के दुरूपयोग कि स्तिथि में  उस पर लगाम कसा जाए और देश कि सम्प्रभुता और लोगो के हितों कि रक्षा कि जाए। 

 

अब सरकार द्वारा बनाए गए कानून को सभी सोशल मीडिया कंपनी और OTT प्लेटफॉर्म  द्वारा अपनाना होगा और एक ग्रीवांस मेकेनिज़्म बनाना होगा और यूजर्स की शिकायतों को 15 दिनों के भीतर निपटाना होगा। 

सरकार का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति देश के बाहर से किसी प्रकार का फेक न्यूज़ भारत में फैलाता है , तो सोशल मीडिया कंपनी को इसकी जानकारी सरकार को देनी होगी और साथ ही यह भी बताना होगा कि इस फेक न्यूज़ कि शुरुआत कहा से हुई और किसने की।  

 

इस कानून के माध्यम से सरकार सोशल मीडिया पर चल रहे अफवाह और फेक न्यूज़ तथा आपत्तिजनक कंटेंट पर लगाम कसना चाहती है जिससे देश के लोगो की हितों की रक्षा हो सके और किसी प्रकार का दुरूपयोग से बचा जा सके। यह कानून 3 महीने बाद से लागू होगा।

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