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chat par sabji ki kheti

घर की छत पर साग-सब्जी उगाने की विधि सीखे और पार्ट टाइम में पैसे भी कमाएं

खाने का सीधे-सीधे ताल्लुक सेहत से है. अगर खाने में जरूरी पोषक तत्व न हो तो हमारी सेहत ख़राब हो सकती है, हम बीमार पड़ सकते है. 

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अगर हम मंडी में उपलब्ध सब्जियों की बात करें तो उसमें सब्जी की बुआई से ले कर उसकी कटाई के बाद उसकी धुलाई तक केमिकल का इस्तेमाल होता है. जिसकी ख़बरें हमें हर आये दिन समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनल के माध्यम से सुनने को मिलती रहती है  

 

इन जहरीलें केमिकल की वजह से हमें कई तरह की घातक बीमारी हो सकती है और हमें लाखों का चूना लगा सकती है.

 

ऐसे में अगर हम खुद सब्जियाँ बो कर खाते है तो हमें कई तरह के फायदे हो सकते है. एक तो हमें साफ सुथरी केमिकल रहित सब्जी मिल जाएगी, साथ ही मंडी से सब्जी खरीदने में लगने वाले पैसे भी बच जाएंगे और खुद से उगाये गए सब्जी को आस पड़ोस में बेच कर कमाई भी कर सकते है . 

 

तो अगर सब्जी उगाने से सेहत और आर्थिक दोनों तरह के फायदे मिलते है तो क्यूँ ना हम अपने घर के छतों का सही से उपयोग करें और मनपसंद सब्जी उगाये।  

 

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका  हिंदियोगी के ब्लॉग पोस्ट किचन गार्डनिंग बिज़नेस में.

 

इस आर्टिकल में मै आपको बताऊंगा की हम अपने घर के छत पर, बालकनी में  या घर में किसी खाली जगह पर मनपसंद सब्जियाँ कैसे बोए, कैसे उनकी देखभाल करें और सब्जी को बोने में किन किन बातों का ध्यान रखे ताकि आप भी ताजी सब्जी का स्वाद ले सके और साथ ही दूसरों को भी अपनी घर की ताजी  सब्जी खिला सके।  

 

तो आइये बिना देरी किये शुरू करते है

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सब्जी उगाने के लिए सबसे पहले छत पर या बालकनी में जगह बनाए। जिससे 15- 25 गमले आप वहाँ रख सके  और जगह अगर बड़ी है तो यह बहुत अच्छी बात है, जगह के अनुसार और अधिक गमले रख सकते है. 

 

अगर आप इतने गमले मार्केट से अफोर्ड  नहीं कर सकते ,तो आप प्लास्टिक की बाल्टी, प्लास्टिक के टब, सब्जी रखने वाले पुराने क्रैट, या बड़े साइज के पुराने पानी रखने वाले कैन का भी उपयोग गमले के रूप में कर सकते है .   

 

गमले का चयन करते समय गमले के साइज का जरूर ध्यान रखें। गमले का साइज सब्ज़ी के प्रकार पर निर्भर करता है. 

 

छोटे पौधे वाले सब्जी जैसे टमाटर, मिर्ची, भिंडी, शिमला मिर्च आदि के लिए छोटे गमलों का उपयोग कर सकते है, लेकिन लता या बेल वाली सब्जियों के लिए बड़े गमले की आवश्यकता होगी जिसमे लगभग 10-12 किलो मिट्टी आ जाएं।  

 

गमले लेते वक्त ये भी चेक कर लें कि गमले में पानी निकलने के लिए छेद है या नहीं। आपको छेद वाले गमले लेने है ताकि पौधे को पर्याप्त मात्रा में हवा मिल सके और गमले में पानी इक्कठा न हो. 

 

और अगर आप प्लास्टिक की बाल्टी, कैन, टब  को कमले के रूप में इस्तेमाल कर रहे है तो इसमें नीचे से 2-4 छोटे छोटे छेद कर लें ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाएं।  नहीं तो पौधे की जड़ें सड़ जाती है और पौधा ख़राब हो जाता है

ऑर्गेनिक/जैविक खाद का उपयोग करें

अब बारी आती है गमले में  मिट्टी और खाद डालने की. दोस्तों मिट्टी आप अपने आस पड़ोस के खाली मैदान, पार्क, या फिर किसी नर्सरी से ले सकते है और जैविक खाद आपको ऑनलाइन अमेज़न पर मिल जाएगी, या फिर आप नर्सरी से भी खाद ले सकते है.  

 

अब मिट्टी में अगर कंकर या खर-पतवार है तो उसे मिट्टी से अलग कर लें और उसके बाद मिट्टी में खाद का मिश्रण करें। मिट्टी और खाद को अच्छे से हाथ से मिक्स करने के बाद उसे गमलें में डाल दें. 

 

गमले में मिट्टी डालने से पहले गमले में नीचे छेद है या नहीं ये ज़रूर चेक कर लें और उसके बाद गमले में सबसे पहले छोटी रोड़ी डालें ताकि पौधे को पानी डालते समय मिट्टी पानी के साथ छेद से बाहर न बहे. उसके बाद गमले में मिट्टी और खाद का मिश्रण डालें। ध्यान रहे गमले में मिट्टी ऊपर से 3-4 इंच कम हो ताकि गमले से पानी बह कर निचे न गिरे।

गमले में बीज़ या पौधा लगाए

गमले में मिट्टी डालने के बाद अब बारी आती है गमले में बीज़ बोने की. बीज़ जब भी लें तो उत्तम क्वालिटी के बीज़ लें. अगर आप गॉँव में रहते है तो हर तरह के बीच दुकानों में  मिल जाएगा लेकिन शहर में बीज़ आप नर्सरी से ले सकते है.

 

बीज़ की जगह जो सब्जी आप उगाना चाहते है उस सब्जी के छोटे पौधे भी गमले में लगा सकते है. पौधे लगाने से जल्दी ही आपको सब्जियाँ मिलनी शुरू हो जाएंगी लेकिन अगर बीज़ बोते है तो आपको कुछ समय वेट करना पर सकता है।  

 

 गमले में बीज़ डालने के बाद बीज़ को मिट्टी से ढक दें और उसमे हलके हलके पानी का छिड़काव करें। ज्यादा पानी न डालें नहीं तो बीज़ ख़राब हो सकती है. 

 

पौधे को विकसित होने के लिए धूप की आवश्यकता होती है इसलिए गमले को छत पर या बालकनी में ऐसी जगह रखें जहाँ पूरी धूप पौधे को मिल सके.

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पौधे की देखभाल करें

अब आप कुछ दिन बाद देखेंगे की जो बीज़ आपने बोए थे उसमे से पौधे बाहर आ रहे है. यही समय होता है जब पौधे को अच्छी देखभाल की ज़रूरत होती है,. 

 

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उसमे समय पर पानी डालते रहे. यह भी ध्यान दें की पानी गमले में इकट्ठा न हो, भरपूर मात्रा में धूप की किरणें मिलती रहे, हर 15-20 दिन में थोड़ी थोड़ी खाद डालते रहे और मिट्टी सख्त न हो उसके लिए हर 5-6 दिन में मिट्टी को खुरपी से उलट पुलट करते रहे

गमले में कौन-कौन सी सब्जियाँ उगा सकते है

आप गमले में हर तरह की सब्जियाँ जैसे टमाटर, लहसुन, धनिया, पुदीना, हरी मिर्च, बैगन, भिंडी, खीरा, लौकी, फूल गोभी, पत्ता गोभी, करेला, बथुआ, पालक, मेथी  आदि  उगा सकते है. बीज़ बोन के लगभग 3-6 महीने में सभी पौधों में फल आने शुरू हो जाते है.  

 

बैगन, भिंडी, टमाटर, लौकी, करेला  जैसे पौधों में कुछ हरे रंग के कीट और सफ़ेद रंग की मक्खियाँ लग जाती है जो की पौधे की पत्तियों को खा जाती है और पौधे को बेकार कर देती है. 

 

अगर आपके पौधे में भी इस तरह के कीट लग रहे है तो आप एक बर्तन में नीम की पत्तियों को उबाल कर उसे ठंडा होने पर अच्छे से छान लें और उन सभी पौधों पर इस पानी का छिड़काव कर दें जिस पर कीट लगे है. इससे सभी प्रकार के कीट मर जाएंगे।

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किचन गार्डनिंग के लिए जरूरी औजार (टूल किट)

किचन गार्डनिंग के लिए आपको गमले तो चाहिए ही उसके आलावा अगर आप अच्छे से गार्डिंग करना चाहते है और सब्जियों की प्रोडक्टिविटी और क्वालिटी को बढ़ाना चाहते है तो आपको कुछ और औजारों की आवश्यकता होती है. 

 

यह सभी औजार आपको लोकल मार्केट या फिर ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर भी आसानी से मिल जाती है. 

 

तो आइये जान लेते है की किन-किन औजारों की आपको आवश्यकता पड़ सकती है

 

दस्ताने (ग्लव्स):-किचन गार्डनिंग करते समय बार बार आपको मिट्टी को छूना पर सकता है जिससे आपके हाथ गंदे हो जाते है और मिट्टी हाथ के नाखूनों में फंस जाते है. इससे बचने के लिए आपको एक दस्ताने की आवश्यकता होती है

 

 खुरपी:- गार्डनिंग में खुरपी बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है. गमले में मिट्टी डालने के लिए, गमले में मिट्टी की गुड़ाई करने के लिए, बीज़ बौने के लिए और गमले में बीज़ बोते समय मिट्टी में लाइनिंग बनाने के लिए आपको  खुरपी की आवश्यकता पड़ती ही है.

 

कैंची और प्रूनर :- पौधे जब बड़े हो जाते है और टहनियाँ ज्यादा फ़ैल जाती है तो टहनियों को काटना जरूरी होता है और उसके लिए आपको एक कैंची या प्रूनर की आवश्यकता होती है 


रस्सी:- बेल या लता वाले सब्ज़ी के पौधे बहुत ज्यादा लम्बे होते है और जहाँ इन्हे रास्ता मिलता है उधर की तरफ़ बढ़ने लगते है इसलिए इन्हे सही दिशा में रखने के लिए आपको रस्सी की भी आवश्यकता होती है.

छत पर सब्ज़ी उगाने के फ़ायदे

छत पर सब्ज़ी उगाने से आपको बहुत फायदा होने वाला है. एक तो आपको हरी और केमिकल से मुक्त ताज़ी सब्जियाँ मिल जाती है जो की मार्केट या मंडी में मिलना मुश्किल है. 

 

और फिर छत पर सब्जियाँ उगाने से छत भी हरा भरा रहता है. जिसकी वजह से आप शाम के समय वहाँ बैठ सकते है, व्यायाम कर सकते  है  और खुद को प्रकृति के नज़दीक महसूस करते है. 

 

खुद से ऑर्गेनिक सब्ज़ी उगा कर खाने से आप मार्केट में मिलने वाले केमिकल से युक्त सब्जियों को खाने से होने वाली बीमारी से भी बच सकते है. साथ ही बाहर से सब्जी खरीद कर लाने में लगने वाले पैसे की भी बचत होती है

सब्ज़ी उगा कर पैसे की कमाई

आप खुद सब्ज़ी उगा कर खाते है तो पहली बचत आपकी यहीं हो गयी की आपको मार्केट जाने और आने  में लगने वाले पैसे की बचत हो गयी और साथ ही सब्जी खरीदने में लगने वाले पैसे भी बच गए. और बचत होना एक तरह की कमाई होना ही है. और इस तरह आप महीने के लगभग 3000-4000 की बचत कर सकते है.

 

साथ ही आप खुद के द्वारा उगाए  सब्जी को अपने आस पड़ोस वालों  को बेच भी  सकते है और इससे भी आपको अच्छी कमाई हो सकती है.जब लोग देखेंगे की आप ऑर्गनिक सब्जियां उगा रहे है जो की मार्केट में मिलना मुश्किल है तो लोग खुद आपसे उन सब्जियों को खरीदने आएंगे। 

 

और जब आपको इस काम का अच्छा अनुभव हो जाए तो आप इस काम को एक बिज़नेस की तरह भी अपना सकते है.

 

कहीं खाली जगह किराये पर ले कर आप सभी तरह की सब्जियाँ बो सकते है और इसे मार्केट में सप्लाई कर सकते है या मार्केट में जा कर बेच सकते है. और मार्केट में ऑर्गनिक सब्जियों की डिमांड भी अच्छी ख़ासी है जिससे आपको अच्छा मुनाफ़ा हो सकता है

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